अन्यथा
आज तुम्हारी सब की
साझी और अलग-अलग चुनौती है
कि तुम सब जो हो,
वास्तव में वही होना चाहते हो कि नहीं।
आज की सांझ
कल के जिस सूर्य को जन्म देगी
वह कंदराओं के भीतर टिमटिमाने वाला
मद्धिम मद्धिम दीपक जैसा नहीं होगा
जिसकी रोशनी में
सब कुछ मायावी और सुंदर लगता है