नदीघर

नदीघर

आज भी कोई महाभारत
या तीसरा विश्व युद्ध नहीं होगा
मध्य युगीन अश्वारोहियों की दुर्दांत वासनाएं
कोई आतंक पताका फहराते हुई
तुम्हारे शारीरिक या आत्मिक दमन की
दुंदुभि बजाती हुई
तुम्हें घुटने टेक कर
जीवन की भीख मांगने के लिए
विवश नहीं करेंगी।
और न ही प्रताड़ित करेंगी
तुम्हें नन्हा सा साहस बटोर कर
अ पनी-अपनी कंदराओं से
बाहर आ जाने के लिए।

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