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दो रातें, दो यादें-कृष्ण किशोर

इस रात मेरे पहलू में शरर...
वो रात है अब तक याद मुझे जिस रात वो कुछ भी कह ना सकी
वो अपनी वफ़ा से हार गई या मेरी मोहब्बत सह न सकी..

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Open Spaces, Open Minds

 Longer we stay outside, our love of diversity becomes stronger -a part of our consciousness. We don't want to change it any other way. It will become suffocating. .. Why can't we take diversity all around us in our daily life in the same spirit? On the contrary, differences of opinions, beliefs, religious ways, and political thoughts upset us, throw us out of balance, choke our normal day to day judgement- we forget that we are out there in vast openness of life.

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इतिहास के पन्नों से: 

उदास क्रान्तिकारी लैटिन अमेरिका--कृष्ण किशोर


......सन्‌ 1491 समय का आखिरी आंकड़ा था जब इस महाद्वीप का हज़ारों सालों का इतिहास एकाएक बदल गया था। स्पेनी आक्रान्ताओं ने 1492 में इस धरती पर अपना वज्र पाँव रखा था। यूरोपीय दैत्य की सोना-चाँदी खाने की भूख का शिकार बना दक्षिणी अमेरिका का महाद्वीप पिछले पाँच सौ सालों में अपने 10 हज़ार वर्ष की उपलब्धियाँ पूरी तरह खो कर भी एक नई अस्मिता खोजने की क्रान्तिकारी तलाश में लगा हुआ है....

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इतिहास के पन्नों से:

समाजवादी क्रांति की विचारभूमि -    कृष्ण किशोर


कम्बोडिया, वियतनाम और लाओस 1940 से 1975 तक साम्राज्यवाद और समाजवादी विचारधारा की टक्कर में सब से अधिक लहूलुहान होने वाला धरती का टुकड़ा रहा। संसार के बहुत से हिस्सों में इस रक्तपात का इतना शोर नहीं सुनाई दिया..... । ये तीनों देश फ्रांस के उपनिवेश थे। पहले फ्रांस से मुक्ति का युद्घ और फिर दूसरे विश्वयुद्घ के बाद ही समाजवादी क्राँति, अमेरिका से लम्बी लड़ाई और फिर कम्बोडिया का गृहयुद्घ/ लाखों लोगों की निर्मम हत्याएं - ऐसी त्रासदी है जिसने इन देशों के ढाई तीन हज़ार साल के इतिहास को धूमिल कर दिया है।...

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बनती-मिटती, जलती-बुझती झोपड़पट्टियां


शहरीकरण के रास्ते में जितने भी पड़ाव चाहे आए हों उन्नीसवीं सदी के शुरू से अब तक, लेकिन रास्ता वही है। एक ही तरफ़ को जाता हुआ - उजड़ते हुए गांव और लहलहाती हुई झोपड़पट्टियां, इधर-उधर अंगारों की तरह दमकते हुए स्लम।   यह उत्पात तो औद्योगिक क्राँति से शुरू हो गया था। जब से चीजें बनने लगीं, तभी से घर उजड़ने शुरू हो गए थे.

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Heroes: Men of Letters

ज्यां पाल सार्त्र का आत्म और अनात्म -    कृष्ण किशोर


...ईश्वर का अस्तित्व मानव-मात्र के लिए पहले से ही बहुत कुछ निश्चित कर देता है। और इंसान की स्वतंत्रता तथा अपने प्रयत्नों द्वारा अपना निर्माता होने की स्थिति को खंडित करता है। इससे एक विचार-स्थिति और आगे जाकर सार्त्र ने अकेले व्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता के अर्थ को भी संशोधित किया। वे सामूहिक स्वतंत्रता के पक्ष में रख कर ही व्यक्ति की स्वतंत्रता को देखने लगे थे।..

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वैश्वीकरण या पश्चिमीकरण


अभी तक का यथार्थ यही नज़र आता है कि वैश्वीकरण का अर्थ व्यापक रूप में पश्चिमीकरण ही है। कुछ एक देशों की व्यापारिक सफ़लता भी सिवाय औद्योगिक निर्यात के पश्चिम को और कुछ नहीं दे पा रही। व्यापक रूप में आधुनिक वैज्ञानिक खोजों का घर भी पश्चिमी देश ही रहे हैं उन्हीं पर आधारित औद्योगिक संपन्नता आज सारे विश्व की पूंजी है। वैश्वीकरण में सांस्कृतिकरण एक महज़ आयोजन है, जो केवल पश्चिम द्वारा ही बाकी सब देशों में किया जा रहा है। पश्चिम का पूर्वीकरण, दक्षिणीकरण या उत्तरीकरण नहीं हो रहा है। सभी का सिर्फ़ पश्चिमीकरण ही हो रहा है।..

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इसी सहरा में कोई आईना तलाश करो


...World Higher education database, (UNESCO )में देशों की शिक्षा का माध्यम भाषाओं की विस्तृत तालिका है । अंग्रेज़ी का नाम यूरोप में सिर्फ नाम-मात्र को ही आता है। इन देशों के प्राथमिक से उच्चतम्‌ शिक्षा माध्यम की भाषा के स्वरूप की एक झलक यहां प्रस्तुत करना असंगत नहीं होगा - आस्ट्रिया की जनभाषा जर्मन है - शिक्षा का माध्यम - जर्मन
चैक रिपब्लिक की - चैक, जर्मन और कहीं-कहीं इंगलिश
बोस्निया - बोस्नियन, सर्बियन, क्रोएशियन
बेल्जियम की - बेल्जियन, फ्रैंच और डच
बल्गारिया की बल्गारियन क्रोएशिया की क्रोएशियन
डैनमार्क की - डैनिश फिनलैण्ड की फिनिश और स्वीडिश
पुर्तगाल की - पोस्चुगीज़ आयरलैण्ड की इंगलिश
जर्मनी की - जर्मन
फ्रांस की - फ्रैंच
ग्रीस की - ग्रीक ,हंगरी की - हंगेरियन
इटली की - इटालियन नीदरलैण्ड की - डच
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