Periodical: Krishan Kishore
... It is a curse that someone gets imposed on us from tiny or huge premises of a party that calls itself political with or without any commitment to political thought or principles..
... It is a curse that someone gets imposed on us from tiny or huge premises of a party that calls itself political with or without any commitment to political thought or principles..
...लेकिन मां, मुझे चाहिए वही खिलौना
मुझे ले दिया था जो तूने
देवी के मेले में सारी शाम घूम कर
बस मैं था , मेला था और तू थी
उससे मैंने अपनी सारी बातें की हैं
मेरी दादी माँ और नानी माँ अब उसकी भी है
..उसके दो पल वहाँ रहने के महिम क्षण ने
घास को घास, पेड़ को पेड़, लोगों को लोग नहीं रहने दिया
लेकिन मैं वहीं जमा रहा
घास पेड़ों और लोगों में अपना चेहरा ढूंढता
..
गांधी ने देखा-
डूबते सूरज की दिशा में भागते लोगों को ।
हंसे ,अपनी उसी हल्के विनोद की मुद्रा में
जिसे पिछली सदी के लोग और आकाशवासी खूब जानते हैं।
कुछ सोचकर बोले ,एक जुलूस निकालना होगा
डूबते सूरज के पक्ष में।
हमारे हाथों पैरों पर
ज़ेवर की तरह खूबसूरत लगे हमें
जंजीरों के यह निशान
और नई सुबह की नीम खुमारी में
एकदम उन्हें छीलकर उतार फेंकने के
ओछेपन से खुद को बचा लिया हमने
..
प्रवासी अहसास की कई परते हैं। कहीं न कहीं अतीत की बची-खुची ऐतिहासिक निजता बनी ही रहती है जो अपने कहीं और होने के एहसास को जीवित रखती है। ठीक अपने घर में न होकर कहीं और होने का एहसास ही प्रवासी एहसास है। अपनी परम्परा और पहचान से जुड़े रहना एक बात है, वहां बैठ कर एक ही ओर देखते रहने का नास्टेलजिया दूसरी बात।